Wednesday, October 9, 2019

Aakash

जब सामने असीम आकाश था
तुमने मेरे पंख बाँध दिए
डोरी तो तुमने अब खोल दी
सामने फिर वही अंतहीन आकाश है
अब
पंखों में उड़ान नहीं बची

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