Wednesday, March 14, 2018

माँ

माँ
आज पूरी तरह समझ पाई हूँ
क्या होता है माँ होना
कृतज्ञ हूँ तेरे उन आँसुओं के लिए
जो कभी ममता के आवेग में
तो कभी मेरी तकलीफ़ों में
मेरे लिए बहे होंगे

कृतज्ञ हूँ उन धड़कनों के लिए
जो मेरे जीवन के उतार चढ़ावों के साथ साथ
घटती बढ़ती रहीं

कृतज्ञ हूँ उन हाथों के लिए
जिन्होंने सम्भाला है
कभी
मेरे नन्हें बचपन को
और कभी बढ़ती वय की उलझनों को

कितना कुछ तुम कहती सिखाती रहीं
कभी सुना
कभी सुन कर भी नहीं सुना
कभी समझा
कभी समझ कर भी नहीं समझा
अब तुम कुछ नहीं कहतीं
मगर अब मैं सुन रही हूँ
कृतज्ञ हूँ उन बातों के लिए
जो तुमने कहीं
और उनके लिए भी
जो तुमने नहीं कहीं
वो न कहा हुआ
अब ज़्यादा सुनाई देता है

कितनी भी धूप हो
एक छाया का एहसास जो हरदम रहता है
उस एहसास के लिए
कृतज्ञ हूँ माँ
कृतज्ञ हूँ ।

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