माँ
आज पूरी तरह समझ पाई हूँ
क्या होता है माँ होना
कृतज्ञ हूँ तेरे उन आँसुओं के लिए
जो कभी ममता के आवेग में
तो कभी मेरी तकलीफ़ों में
मेरे लिए बहे होंगे
कृतज्ञ हूँ उन धड़कनों के लिए
जो मेरे जीवन के उतार चढ़ावों के साथ साथ
घटती बढ़ती रहीं
कृतज्ञ हूँ उन हाथों के लिए
जिन्होंने सम्भाला है
कभी
मेरे नन्हें बचपन को
और कभी बढ़ती वय की उलझनों को
कितना कुछ तुम कहती सिखाती रहीं
कभी सुना
कभी सुन कर भी नहीं सुना
कभी समझा
कभी समझ कर भी नहीं समझा
अब तुम कुछ नहीं कहतीं
मगर अब मैं सुन रही हूँ
कृतज्ञ हूँ उन बातों के लिए
जो तुमने कहीं
और उनके लिए भी
जो तुमने नहीं कहीं
वो न कहा हुआ
अब ज़्यादा सुनाई देता है
कितनी भी धूप हो
एक छाया का एहसास जो हरदम रहता है
उस एहसास के लिए
कृतज्ञ हूँ माँ
कृतज्ञ हूँ ।
आज पूरी तरह समझ पाई हूँ
क्या होता है माँ होना
कृतज्ञ हूँ तेरे उन आँसुओं के लिए
जो कभी ममता के आवेग में
तो कभी मेरी तकलीफ़ों में
मेरे लिए बहे होंगे
कृतज्ञ हूँ उन धड़कनों के लिए
जो मेरे जीवन के उतार चढ़ावों के साथ साथ
घटती बढ़ती रहीं
कृतज्ञ हूँ उन हाथों के लिए
जिन्होंने सम्भाला है
कभी
मेरे नन्हें बचपन को
और कभी बढ़ती वय की उलझनों को
कितना कुछ तुम कहती सिखाती रहीं
कभी सुना
कभी सुन कर भी नहीं सुना
कभी समझा
कभी समझ कर भी नहीं समझा
अब तुम कुछ नहीं कहतीं
मगर अब मैं सुन रही हूँ
कृतज्ञ हूँ उन बातों के लिए
जो तुमने कहीं
और उनके लिए भी
जो तुमने नहीं कहीं
वो न कहा हुआ
अब ज़्यादा सुनाई देता है
कितनी भी धूप हो
एक छाया का एहसास जो हरदम रहता है
उस एहसास के लिए
कृतज्ञ हूँ माँ
कृतज्ञ हूँ ।
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