Monday, October 16, 2017

सपने

ज़िंदगी को नहीं
आदमी एक सपने को जीना चाहता है
दर हक़ीक़त
सपनों की मिट्टी कूट कर
जो सड़क बनती है
ज़िंदगी उसके ऊपर शान से
क़दम रखती हुई
चलती है


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