शक होता है तेरे होने पर
तो कभी
यक़ीन होता है
तेरे होने पर
बार बार ज़िंदगी की दीवार पर
कभी शक
तो कभी यक़ीन की
ईंटें
चुनती हूँ गिराती हूँ
पता नहीं आख़िरी ईंट कौन सी होगी
तो कभी
यक़ीन होता है
तेरे होने पर
बार बार ज़िंदगी की दीवार पर
कभी शक
तो कभी यक़ीन की
ईंटें
चुनती हूँ गिराती हूँ
पता नहीं आख़िरी ईंट कौन सी होगी
No comments:
Post a Comment